UPPCS प्रारंभिक परीक्षा 2024 · सामान्य अध्ययन I · प्रश्न 13

Read in English · हिंदी अनुवाद: Battle IAS

जस्टिस पार्टी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए –

  • 1. जस्टिस पार्टी ने कांग्रेस को ब्राह्मण-प्रधान संगठन कहकर उसका विरोध किया।
  • 2. इसने ग़ैर-ब्राह्मणों के लिए वैसे ही सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की माँग की, जैसा मॉर्ले-मिंटो सुधारों ने मुसलमानों को दिया था।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  1. a 1 और 2 दोनों
  2. b न तो 1, न ही 2
  3. c केवल 1
  4. d केवल 2
उत्तर (a) · Battle IAS द्वारा जाँचा गया

विकल्प (a), दोनों, सही है। कथन 1 सही है: 1916 में टी.एम. नायर, पी. त्यागराय चेट्टी और सी. नटेश मुदलियार द्वारा साउथ इंडियन लिबरल फ़ेडरेशन के रूप में स्थापित जस्टिस पार्टी ने कांग्रेस पर ब्राह्मण-प्रधान संस्था होने का आरोप लगाया। कथन 2 सही है: इसने 1909 के मॉर्ले-मिंटो सुधारों द्वारा मुसलमानों को दिए गए प्रतिनिधित्व की तर्ज़ पर ग़ैर-ब्राह्मणों के लिए पृथक सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की माँग की। अवधारणा: मॉन्टफ़ोर्ड सुधारों ने मद्रास में ग़ैर-ब्राह्मणों को आरक्षित सीटें दीं, और पार्टी ने 1920 का चुनाव जीतकर प्रांत चलाया तथा 1921 में पहले सांप्रदायिक आरक्षण आदेश पारित किए। बाद में 1944 में यह पेरियार के द्रविड़ कड़गम में विलीन हो गई। इसका ‘ग़ैर-ब्राह्मण घोषणापत्र’ 1916 में आया।

सावधानी

जस्टिस पार्टी ग़ैर-ब्राह्मणों के लिए मॉर्ले-मिंटो जैसी सांप्रदायिक सीटें चाहती थी।

संबंधित UPPCS प्रश्न

UPPCS प्रारंभिक 2024 के सभी प्रश्न →