UPPCS प्रारंभिक परीक्षा 2022 · सामान्य अध्ययन I · प्रश्न 99

Read in English · हिंदी अनुवाद: Battle IAS

‘संविधान के मूल ढाँचे’ की अवधारणा सर्वोच्च न्यायालय ने किस वाद में प्रतिपादित की?

  1. a गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य – 1967
  2. b यूसुफ़ बनाम बंबई राज्य – 1954
  3. c केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य – 1973
  4. d चित्रलेखा बनाम मैसूर राज्य – 1964
उत्तर (c) · Battle IAS द्वारा जाँचा गया

विकल्प (c), केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973), सही है। इस वाद में 13 न्यायाधीशों की पीठ ने 7:6 के बहुमत से निर्णय दिया कि संसद अनुच्छेद 368 के अंतर्गत मौलिक अधिकारों सहित संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है, लेकिन उसके मूल ढाँचे को नहीं बदल सकती। 1967 के गोलकनाथ (a) वाद में निर्णय हुआ था कि संसद मौलिक अधिकारों में संशोधन कर ही नहीं सकती। 1954 के यूसुफ़ बनाम बंबई राज्य (b) वाद में अनुच्छेद 15(3) के अंतर्गत महिलाओं के लिए विशेष प्रावधानों को वैध ठहराया गया। 1964 का चित्रलेखा बनाम मैसूर राज्य (d) वाद जाति और आर्थिक मानदंडों पर आधारित आरक्षण से संबंधित था। अवधारणा: मूल ढाँचे की विशेषताओं में न्यायिक पुनरावलोकन, पंथनिरपेक्षता, संघवाद और स्वतंत्र चुनाव शामिल हैं, जिनकी पुष्टि इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण (1975) और मिनर्वा मिल्स (1980) में हुई।

सावधानी

गोलकनाथ (1967) पहले आया, पर उसने यह सिद्धांत नहीं दिया; केशवानंद (1973) ने दिया।

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